Gold Silver Rate 6 February 2026 :- पिछले कुछ दिनों से जिस तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी, अब वही रफ्तार अचानक थमती दिखाई दे रही है। सोना और चांदी, जिन्हें आम तौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, उनमें आई तेज गिरावट ने बाजार का माहौल थोड़ा चिंताजनक बना दिया है। 6 फरवरी को भी घरेलू वायदा बाजार में दोनों धातुओं की कीमतों में जोरदार फिसलन देखने को मिली, जिससे छोटे निवेशकों से लेकर बड़े ट्रेडर्स तक सभी सतर्क हो गए हैं।
घरेलू कमोडिटी बाजार में आज मुनाफावसूली का दबाव साफ नजर आया। Multi Commodity Exchange of India पर गोल्ड अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट एक प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, जबकि सिल्वर मार्च फ्यूचर्स में भारी बिकवाली देखी गई और करीब छह प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज हुई। कारोबारी सत्र के दौरान चांदी की कीमत गिरकर ₹2,29,187 प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं सोना करीब दो प्रतिशत फिसलकर ₹1,49,396 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया। एक ही दिन में सोना लगभग ₹1,650 सस्ता हो गया और चांदी में भी ₹12,550 से ज्यादा की गिरावट ने बाजार की हलचल बढ़ा दी।
रिटेल बाजार भी इस दबाव से बच नहीं पाया। ज्वेलरी मार्केट में 24 कैरेट सोना गिरावट के साथ ₹1,50,800 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। चांदी भी तेज लुढ़ककर ₹2,35,380 प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। जिन लोगों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी, उनके लिए यह गिरावट चिंता की वजह बन सकती है, जबकि नए खरीदार इसे एक अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोर तस्वीर का असर भी घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दिया। स्पॉट सिल्वर करीब 71.32 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि पिछले सत्र में इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई थी। पूरे हफ्ते में चांदी करीब 16 प्रतिशत कमजोर हो चुकी है, जो कई सालों बाद इतनी तेज साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। गोल्ड स्पॉट भी दबाव में रहा और लगभग 2.20 प्रतिशत टूटकर 4,816 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड करता दिखा।
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस गिरावट की बड़ी वजहों में शामिल है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटी अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगी हो जाती हैं। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ ही कमजोर ग्लोबल संकेत और स्पॉट डिमांड में सुस्ती ने भी सोना और चांदी पर लगातार दबाव बनाए रखा है। निवेशकों में फिलहाल जोखिम से दूरी बनाने की भावना बढ़ी है, जिसका असर बाजार की चाल में साफ दिख रहा है।
तेजी के बाद इस तरह का ठहराव या गिरावट बाजार के स्वाभाविक चक्र का हिस्सा होता है। ऐसे समय में भावनाओं में बहकर फैसले लेने के बजाय समझदारी और धैर्य जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशक इस उतार-चढ़ाव को सामान्य मान सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह दौर काफी संवेदनशील है और सतर्क रहने की जरूरत है।
