LTCG On Share :- कई बार ऐसा होता है कि आपने सालों पहले किसी अच्छे शेयर में भरोसा दिखाया, उसे धैर्य के साथ होल्ड किया और अब जब वह अच्छा रिटर्न दे रहा है, तो बेचने का मन बन रहा है. लेकिन बेचने से पहले एक सवाल जरूर मन में आता है कि टैक्स कितना देना पड़ेगा. अगर आप भी इसी सोच में हैं, तो यह लेख आपके लिए है. यहां हम बिना किसी मुश्किल शब्दों के, बिल्कुल इंसानी अंदाज में समझेंगे कि पांच साल तक शेयर होल्ड करने के बाद टैक्स कैसे लगता है.
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Long Term Capital Gain Tax on Shares
जब कोई निवेशक इक्विटी शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड को एक साल से ज्यादा समय तक होल्ड करके बेचता है, तो उससे होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG की कैटेगरी में आता है. चूंकि यहां होल्डिंग पीरियड पूरे पांच साल का है, इसलिए यह पूरी तरह लॉन्ग टर्म माना जाएगा.
आयकर कानून की धारा 112A के तहत यह साफ किया गया है कि इक्विटी शेयरों पर LTCG टैक्स तभी लागू होता है, जब शेयर खरीदते और बेचते समय सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT का भुगतान किया गया हो. अगर STT नहीं दिया गया है, तो इस धारा के तहत मिलने वाली टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलता.
मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी भी वित्त वर्ष में इक्विटी से होने वाले पहले 1 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता. यानी अगर आपका कुल मुनाफा 1 लाख रुपये तक है, तो आप पूरी तरह टैक्स फ्री रहते हैं. लेकिन जैसे ही मुनाफा इस सीमा से ऊपर जाता है, 1 लाख से ज्यादा की रकम पर 10 फीसदी टैक्स लगाया जाता है. इस टैक्स में इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता और इसके ऊपर 4 फीसदी हेल्थ और एजुकेशन सेस भी जुड़ता है. अगर निवेशक हाई इनकम स्लैब में आता है, तो सरचार्ज के कारण टैक्स बोझ और बढ़ सकता है.
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उदाहरण से समझिए पूरा गणित
मान लीजिए किसी निवेशक ने पांच साल पहले 2 लाख रुपये में शेयर खरीदे थे और अब उन्हें 5.5 लाख रुपये में बेच दिया. इस स्थिति में कुल मुनाफा 3.5 लाख रुपये हुआ. इसमें से 1 लाख रुपये पूरी तरह टैक्स फ्री रहेंगे. बची हुई 2.5 लाख रुपये की रकम पर 10 फीसदी के हिसाब से 25 हजार रुपये टैक्स बनेगा. जब इसमें 4 फीसदी सेस जोड़ा जाएगा, तो कुल टैक्स करीब 26 हजार रुपये के आसपास पहुंच सकता है. अगर निवेशक ज्यादा आय वाली कैटेगरी में आता है, तो सरचार्ज लगने से यह रकम और बढ़ सकती है.
टैक्स प्लानिंग क्यों है जरूरी
यह समझना बहुत जरूरी है कि टैक्स सिर्फ मुनाफे पर लगता है, पूरी बिक्री रकम पर नहीं. इसके अलावा, 1 लाख रुपये की LTCG छूट हर वित्त वर्ष में नए सिरे से मिलती है. सही योजना बनाकर और समय को समझकर निवेश करने से टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है. यही कारण है कि लंबे समय तक शेयर होल्ड करना न सिर्फ बेहतर रिटर्न देता है, बल्कि टैक्स के लिहाज से भी शॉर्ट टर्म निवेश के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अगर आप निवेश को सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि समझदारी का फैसला मानते हैं, तो टैक्स नियमों की यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है.
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Disclaimer :- यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. टैक्स नियम समय के साथ बदल सकते हैं. किसी भी निवेश या टैक्स से जुड़े फैसले से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें.
