क्या थिएटर में जा कर देखने लायक है Toxic , जानें कैसी है फिल्म !

By: A S

On: Wednesday, August 26, 2026 11:56 AM

Toxic Movie Review :- क्या थिएटर में जा कर देखने लायक है Toxic , जानें कैसी है फिल्म !
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Toxic Movie Review :- काफी लंबे इंतजार और कई बार रिलीज डेट टलने के बाद आखिरकार ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ 26 अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंच गई है। फिल्म को लेकर सबसे बड़ी एक्साइटमेंट ‘रॉकिंग स्टार’ यश की वापसी को लेकर थी। साल 2022 में ‘केजीएफ चैप्टर 2’ की जबरदस्त सफलता के बाद यश पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आए हैं। ऐसे में फैंस के बीच फिल्म को लेकर जबरदस्त माहौल बना हुआ था।

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फिल्म को लेकर अब शुरुआती रिव्यू भी सामने आ चुका है। अगर यश के स्टारडम, लुक और एक्शन की बात करें तो फिल्म काफी दमदार नजर आती है, लेकिन कहानी के स्तर पर कुछ जगहों पर दर्शकों को थोड़ी कमी महसूस हो सकती है।

यश की एंट्री से ही छा जाता है ‘TOXIC’

टॉक्सिक‘ में यश पूरी तरह अपने स्टारडम के रंग में नजर आते हैं। उनका लुक बेहद स्टाइलिश है और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी फिल्म को अलग ही एनर्जी देती है। जैसे ही यश पर्दे पर आते हैं, माहौल बदलता हुआ महसूस होता है। उनके डायलॉग्स पर थिएटर में तालियां और सीटियां बजने की बात भी सामने आई है। एक्शन से लेकर उनके अंदाज तक, यश ने अपने किरदार में पूरी ताकत झोंक दी है।

उनका सिगरेट पीने का अंदाज हो या फिर दुश्मनों से भिड़ने का स्टाइल, हर जगह उनका स्वैग साफ दिखाई देता है। फिल्म में उनका एक डायलॉग, “वायलेंस मेरी लैंग्वेज रही, यूनिवर्सल लैंग्वेज”, भी दर्शकों के बीच खासा असर छोड़ता नजर आता है। कुल मिलाकर यश के फैंस के लिए उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।

नयनतारा से लेकर हुमा कुरैशी ने दिखाया दम

‘Toxic’ की खासियत सिर्फ यश तक सीमित नहीं है। फिल्म में कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुकमणि वसंत जैसी शानदार अदाकाराएं भी अहम भूमिकाओं में हैं। हुमा कुरैशी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करती हैं। वहीं नयनतारा एक्शन वाले हिस्सों में काफी मजबूत नजर आती हैं। उनका किरदार फिल्म की कहानी को एक अलग मजबूती देता है। दूसरी तरफ कियारा आडवाणी और यश की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री भी दर्शकों को पसंद आने वाली बताई जा रही है। फिल्म की महिला स्टारकास्ट को सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उनके किरदार कहानी में अपनी जगह बनाते दिखाई देते हैं।

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‘Toxic’ के ट्रेलर में यश और कियारा आडवाणी के कुछ इंटीमेट सीन्स ने रिलीज से पहले काफी चर्चा और विवाद खड़ा किया था। हालांकि फिल्म देखने के बाद इन सीन्स को लेकर वैसा विवाद महसूस नहीं होता, जैसा ट्रेलर के समय नजर आया था। कहानी के संदर्भ में देखें तो किरदारों और उनके रिश्तों को काफी हद तक जस्टिफाई किया गया है। ऐसे में फिल्म देखने के बाद ट्रेलर में दिखाए गए कुछ हिस्से ज्यादा विवादित नहीं लगते।

TOXIC Movie Story

यश की शानदार परफॉर्मेंस और दमदार एक्शन के बावजूद फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी का फ्लो बताया जा रहा है। कुछ हिस्सों में कहानी दर्शकों को अपने साथ पूरी तरह जोड़ नहीं पाती। राया के बचपन से जुड़ी कहानी में इमोशन की काफी गुंजाइश है। किरदार के दर्द को शब्दों में महसूस किया जा सकता है, लेकिन वही भावनात्मक असर पर्दे पर उतनी मजबूती से नहीं बन पाता। यही वजह है कि कहानी के कुछ हिस्से दर्शकों को भावनात्मक रूप से उतना प्रभावित नहीं करते, जितनी उम्मीद की जा सकती थी। हालांकि इसका असर यश की परफॉर्मेंस पर नहीं पड़ता। उन्होंने अपने हिस्से के लगभग हर सीन को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है।

यश और नयनतारा के इर्द-गिर्द घूमती है कहानी

‘Toxic’ में यश के साथ नयनतारा की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। दोनों अपने-अपने किरदारों में मजबूत नजर आते हैं और फिल्म की कहानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं के आसपास घूमता है। जहां यश अपने स्वैग और एक्शन से स्क्रीन पर छाए रहते हैं, वहीं नयनतारा अपने किरदार में गंभीरता और मजबूती लेकर आती हैं। दोनों की मौजूदगी फिल्म को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

हिंसा के मामले में काफी आगे है ‘TOXIC’

फिल्म में भरपूर एक्शन और हिंसा देखने को मिलती है। शुरुआती रिव्यू के मुताबिक हिंसा के स्तर पर ‘Toxic’ काफी आगे जाती है और इसकी तुलना ‘धुरंधर’ से भी की जा रही है। हालांकि फिल्म में हिंसा काफी ज्यादा है, लेकिन यही इसका एक बड़ा आकर्षण भी बनकर सामने आता है। थिएटर में दर्शकों के फिल्म को एंजॉय करने की बात भी सामने आई है, खासकर उन सीन्स में जहां यश का दमदार अंदाज देखने को मिलता है।

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क्या ‘TOXIC’ देखने लायक है?

अगर आप यश के बड़े फैन हैं और ‘केजीएफ चैप्टर 2’ के बाद उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे, तो ‘Toxic’ आपको निराश नहीं करेगी। यश का लुक, उनका स्वैग, एक्शन और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। हालांकि अगर आप ऐसी फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं जिसकी कहानी शुरुआत से अंत तक आपको भावनात्मक रूप से बांधे रखे, तो कुछ जगहों पर आपको कमी महसूस हो सकती है। फिल्म में दमदार मोमेंट्स और शानदार परफॉर्मेंस हैं, लेकिन कहानी का फ्लो हर जगह उतना मजबूत नहीं दिखाई देता।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध शुरुआती रिव्यू और दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। फिल्म को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग हो सकती है। अंतिम राय फिल्म को पूरी तरह देखने के बाद ही बनाना बेहतर होगा।


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S Singh is the founder and chief editor of Samachar Samiksha, a trusted platform delivering the latest news and trending stories with accuracy, clarity, and an engaging style. With a passion for credible journalism and a knack for simplifying complex topics, Subodh ensures every article resonates with readers while maintaining factual integrity. Through Samachar Samiksha, he strives to keep audiences informed, inspired, and connected to what matters most.
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