एलपीजी संकट के बीच गोबर गैस योजना बनी संजीवनी !

By: A S

On: Tuesday, April 28, 2026 12:28 PM

Biogas Plant Yojana :- एलपीजी संकट के बीच गोबर गैस योजना बनी संजीवनी !
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Biogas Plant Yojana :- महंगाई, गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और समय-समय पर एलपीजी की किल्लत ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को रसोई से जुड़ी समस्याओं का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां महिलाएं बायोगैस प्लांट योजना का लाभ लेकर न केवल अपने घर की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रही हैं।

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Biogas Plant Yojana

गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों की करीब 110 महिलाएं उत्तर प्रदेश सरकार की आजीविका मिशन योजना के तहत गठित संगठन “बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन” से जुड़ी हैं। इन महिलाओं ने बायोगैस प्लांट लगाकर घर की ईंधन समस्या का समाधान निकाला है। यह पहल ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण बन गई है, जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर असर देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में इन महिलाओं ने खुद के लिए एक मजबूत और स्थायी विकल्प तैयार किया है।

मुफ्त गैस के साथ पैसों की बचत

बायोगैस प्लांट से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे महिलाओं को महंगे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। हर महीने होने वाला खर्च कम हो रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति में राहत मिल रही है। गांव की महिलाओं का कहना है कि अब गैस खत्म होने या सिलेंडर न मिलने की चिंता काफी हद तक खत्म हो गई है। घर में आसानी से ईंधन उपलब्ध हो रहा है और समय की भी बचत हो रही है।

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बायोगैस से बन रही जैविक खाद

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि प्लांट से निकलने वाले अवशेष को बेकार नहीं फेंका जाता। उसका उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है। इससे खेतों की उर्वरता बढ़ रही है और किसानों को रासायनिक खाद पर कम खर्च करना पड़ रहा है। यानी एक ही योजना से गैस भी मिल रही है, बचत भी हो रही है और खेती को भी फायदा पहुंच रहा है।

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दूध बेचकर बढ़ रही आमदनी

इस संगठन से जुड़ी महिलाएं डेयरी कार्य से भी जुड़ी हुई हैं। वे दूध बेचकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। भटहट ब्लॉक की रहने वाली सीमा बताती हैं कि योजना से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। दूध बेचने से कमाई हो रही है और बायोगैस प्लांट से घर की ईंधन समस्या भी खत्म हो गई है। वहीं भरोहिया और गोला क्षेत्र की महिलाओं राजकुमारी और पिंकी का कहना है कि इस योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। एलपीजी संकट के समय बायोगैस ने उन्हें राहत दी है।

मुख्यमंत्री ने भी सराही पहल

इस योजना की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भी इसकी सराहना की है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह के मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा दिया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण परिवार इसका लाभ उठा सकें। गोरखपुर की यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बदलाव की नई तस्वीर है। जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो पूरा परिवार मजबूत होता है। बायोगैस प्लांट के जरिए गोरखपुर की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि सही अवसर और सही दिशा मिलने पर गांव की महिलाएं किसी से कम नहीं हैं।

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Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। योजना से जुड़ी सुविधाएं, लाभ और संख्या समय के साथ बदल सकती हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभाग या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।


A S

S Singh is the founder and chief editor of Samachar Samiksha, a trusted platform delivering the latest news and trending stories with accuracy, clarity, and an engaging style. With a passion for credible journalism and a knack for simplifying complex topics, Subodh ensures every article resonates with readers while maintaining factual integrity. Through Samachar Samiksha, he strives to keep audiences informed, inspired, and connected to what matters most.
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