E20 Petrol :- भारत में इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर खूब चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच कई तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं। कोई इसे इंजन के लिए नुकसानदायक बता रहा है तो कोई माइलेज कम होने का दावा कर रहा है। ऐसे में करोड़ों वाहन मालिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सच क्या है? अब इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब देकर बताया है कि E20 ईंधन को लेकर लोगों को किन बातों की चिंता करनी चाहिए और किन बातों की नहीं।
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E20 Petrol को लेकर सरकार ने संसद में क्या कहा?
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए अधिकांश वाहनों के इंजन में किसी बड़े बदलाव या मॉडिफिकेशन की जरूरत नहीं है। सरकार के अनुसार E20 ईंधन को अपनाने का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ पुराने वाहनों में ईंधन प्रणाली से जुड़े रबर के कुछ पार्ट्स बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। लेकिन इसे किसी बड़ी तकनीकी समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह काम सामान्य सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है।
E20 Petrol से किन गाड़ियों पर पड़ सकता है असर?
सरकार ने बताया कि इंडियन ऑयल, आईआईपी देहरादून, SIAM और ARAI द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि 1 अप्रैल 2005 के बाद लॉन्च हुई और वर्ष 2016 से पहले बनी BS-III मानक वाली कुछ दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों में E20 ईंधन का सीमित प्रभाव देखने को मिल सकता है। इन वाहनों में ईंधन सप्लाई सिस्टम में लगे रबर होज, रबर सील, गैस्केट और वॉशर जैसे हिस्सों को समय के साथ E20 कम्पैटिबल पार्ट्स से बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि यह बदलाव वाहन की नियमित सर्विस के दौरान आसानी से किया जा सकता है और इससे किसी बड़ी मरम्मत की आवश्यकता नहीं होती।
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E20 Petrol से इंजन खराब होगा या नहीं?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ी चिंता इंजन की सुरक्षा को लेकर रही है। इस पर सरकार ने साफ किया कि प्रयोगशाला परीक्षणों और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में किए गए फील्ड ट्रायल्स के दौरान इंजन में किसी तरह की असामान्य घिसावट, इंजन सीज होने या गंभीर तकनीकी खराबी का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसके अलावा वाहन की ड्राइविंग क्षमता, कोल्ड स्टार्ट, इंजन के मेटल पार्ट्स और प्लास्टिक पार्ट्स पर भी E20 का कोई नकारात्मक प्रभाव दर्ज नहीं किया गया। सरकार ने यह भी बताया कि ऑटोमोबाइल कंपनियां E20 ईंधन के साथ आने वाली अपनी वारंटी को भी जारी रखे हुए हैं।
E20 Petrol से माइलेज कम होता है?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा माइलेज को लेकर हो रही है। कई लोगों का दावा है कि E20 इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी पहले से कम माइलेज देने लगी है। लेकिन सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। वाहन की स्थिति, इंजन की देखभाल, समय पर इंजन ऑयल बदलना, एयर फिल्टर की सफाई, सही टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट, ड्राइविंग स्टाइल और एयर कंडीशनर का उपयोग जैसे कई महत्वपूर्ण कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। इसलिए केवल E20 पेट्रोल को माइलेज कम होने का कारण मानना सही नहीं होगा।
अगर आपकी गाड़ी पुरानी है तो क्या करें?
यदि आपकी कार या बाइक वर्ष 2016 के बाद की BS-IV या BS-VI मॉडल है, तो वह E20 पेट्रोल के लिए पहले से ही अनुकूल मानी जाती है। ऐसे वाहन मालिकों को किसी अतिरिक्त बदलाव की जरूरत नहीं है। वहीं यदि आपके पास वर्ष 2016 से पहले की BS-III गाड़ी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अगली नियमित सर्विसिंग के दौरान अधिकृत सर्विस सेंटर पर ईंधन पाइप, रबर होज, गैस्केट और सील की जांच जरूर कराएं। यदि आवश्यकता हो तो इन्हें E20 कम्पैटिबल पार्ट्स से बदलवा लेना बेहतर रहेगा।
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सरकार लगातार E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है क्योंकि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। संसद में दिए गए जवाब से यह भी साफ हो गया है कि अधिकांश आधुनिक वाहनों के लिए E20 सुरक्षित माना जा रहा है। वहीं पुराने वाहन मालिकों को केवल कुछ रबर पार्ट्स की समय-समय पर जांच कराने की सलाह दी गई है।
Disclaimer :- यह लेख संसद में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री द्वारा दिए गए लिखित जवाब तथा उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी तकनीकी बदलाव या पार्ट्स बदलवाने से पहले अपने वाहन निर्माता या अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह अवश्य लें।






