Gold Silver Price 5 February 2026 :- पिछले कुछ दिनों में सोना और चांदी के भाव ने ऐसा उतार-चढ़ाव दिखाया है कि आम निवेशक ही नहीं, अनुभवी लोग भी थोड़ा असमंजस में हैं। कुछ दिन पहले तक जो कीमतें तेजी से नीचे आ रही थीं, अब वही दोबारा रफ्तार पकड़ती दिख रही हैं। ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी खरीदारी का सही समय है या फिर इंतजार करना बेहतर रहेगा।
कमोडिटी बाजार में कीमती धातुओं की इस हलचल ने लोगों का ध्यान फिर से अपनी ओर खींच लिया है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी ने पिछले दो दिनों में जोरदार वापसी की है, जिससे यह साफ है कि बाजार में अभी भी इनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।
Gold Silver Price On MCX
बुधवार शाम तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने और चांदी दोनों में अच्छी तेजी देखी गई। 2 अप्रैल वायदा का सोना 5,522 रुपये यानी करीब 3.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59,331 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं मार्च वायदा वाली चांदी 21,278 रुपये यानी करीब 7.94 प्रतिशत उछलकर 2,89,293 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। यह तेजी बताती है कि हाल की गिरावट के बाद बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू हो गई है और निवेशकों का भरोसा अभी टूटा नहीं है।

गिरावट के बाद कितनी मजबूत वापसी
दो दिन पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। तेज बिकवाली के कारण सोना और चांदी अपने निचले स्तरों तक पहुंच गए थे। सोमवार को सोने का भाव करीब 1.37 लाख रुपये के स्तर पर आ गया था, जो अब बढ़कर लगभग 1.59 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। यानी सिर्फ दो दिनों में करीब 22,000 रुपये की तेजी देखने को मिली।
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चांदी ने भी कुछ ऐसा ही प्रदर्शन किया। सोमवार को इसकी कीमत करीब 2.25 लाख रुपये तक गिर गई थी, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 2.89 लाख रुपये पर पहुंच गई है। इस तरह चांदी में भी दो दिनों के भीतर करीब 64,000 रुपये का उछाल दर्ज हुआ।
रिकॉर्ड हाई से अभी भी सस्ते दाम
25 जनवरी 2026 को सोना और चांदी ने अपना रिकॉर्ड हाई बनाया था। उस समय सोना करीब 1.93 लाख रुपये के स्तर तक गया था, जबकि चांदी का रिकॉर्ड हाई करीब 4.20 लाख रुपये रहा। मौजूदा भाव की तुलना करें तो सोना अभी भी अपने उच्चतम स्तर से करीब 34,000 रुपये नीचे है और चांदी लगभग 1.31 लाख रुपये सस्ती चल रही है। इस नजरिए से देखें तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्तर अभी भी आकर्षक माने जा सकते हैं।

गिरावट की असली वजह क्या रही
जब सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचे, तब बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। लगातार प्रॉफिट बुकिंग के कारण बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर असर डाला। आम तौर पर डॉलर मजबूत होने पर कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बनता है, और यही हाल सोने और चांदी के साथ भी देखने को मिला। हालांकि यह गिरावट ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी, क्योंकि मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से थी, न कि किसी बुनियादी कमजोरी के कारण। लंबी अवधि के नजरिए से सोना और चांदी अभी भी मजबूत माने जा रहे हैं। ऐसे में जो निवेशक लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, वे धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।
शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए थोड़ा धैर्य रखना समझदारी हो सकती है। बाजार में हल्की गिरावट आने पर खरीदारी करना बेहतर माना जा रहा है। SIP या चरणबद्ध निवेश का तरीका जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। अपने कुल पोर्टफोलियो का लगभग 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा सोना और चांदी में रखना संतुलित रणनीति मानी जाती है, जिससे बड़े नुकसान से बचाव भी हो सकता है और स्थिरता भी मिलती है।
Disclaimer :- यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें, क्योंकि बाजार जोखिमों के अधीन होता है।






