Budget 2026 Relief and Cost Impact :- हर साल बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होता, यह सीधे हमारे घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, रोजमर्रा की चीजों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा होता है। इस बार 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में पेश बजट में भी सरकार ने युवाओं, मिडिल क्लास और आम परिवारों को केंद्र में रखने की बात कही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे कुछ चीजें सस्ती होंगी और कुछ पर जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह बजट आपकी जिंदगी को कैसे छूता है।
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विदेश में पढ़ाई का सपना अब थोड़ा आसान
जो परिवार अपने बच्चों को विदेश पढ़ने भेजने का सपना देखते हैं, उनके लिए यह बड़ी राहत है। अब मान्यता प्राप्त बैंक या संस्था से लिए गए एजुकेशन लोन के जरिए विदेश पैसा भेजने पर TCS नहीं लगेगा। पहले यह एक बड़ा अतिरिक्त बोझ बन जाता था। साथ ही लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत बिना TCS के पैसे भेजने की सीमा 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इसका मतलब है कि पढ़ाई, इलाज या जरूरी खर्चों के लिए विदेश पैसा भेजना पहले से आसान और थोड़ा सस्ता हो गया है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह फैसला मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की राहत देता है।
दवाइयों के दाम कम होने की उम्मीद
इलाज का खर्च कई बार परिवारों को तोड़ देता है। ऐसे में ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना का ऐलान राहत भरा है। सरकार ने अगले पांच साल के लिए 10,000 करोड़ रुपये तय किए हैं, जिससे जरूरी दवाओं की उपलब्धता और उत्पादन बढ़ेगा। खासकर डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों की दवाओं के दाम कम होने की संभावना है। इससे मरीजों को इलाज टालना नहीं पड़ेगा और परिवारों पर आर्थिक दबाव कुछ हल्का होगा।

खेल का सामान सस्ता, युवाओं को बढ़ावा
सरकार ने खेलो इंडिया को मजबूत तरीके से लागू करने की बात कही है। खेल से जुड़े सामान पर राहत का असर दिख सकता है। बैट, बॉल, फिटनेस उपकरण जैसे सामान सस्ते होने की उम्मीद है। इससे बच्चों और युवाओं के लिए खेल सिर्फ शौक नहीं बल्कि एक सुलभ विकल्प बन सकता है। जब सामान सस्ता होगा तो भागीदारी भी बढ़ेगी और खेल संस्कृति को मजबूती मिलेगी।
मछुआरों और समुद्री उद्योग को सहारा
भारत के जहाजों द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाकों में पकड़ी गई मछलियों पर कस्टम ड्यूटी हटाने का फैसला समुद्री मत्स्य उद्योग के लिए बड़ा कदम है। इससे मछुआरों की कमाई बेहतर हो सकती है और सी फूड की कीमतों में भी कुछ नरमी आ सकती है। तटीय इलाकों के परिवारों के लिए यह सीधे आय से जुड़ा फायदा है।
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चमड़ा उद्योग को बढ़ावा, रोजमर्रा के सामान सस्ते
चमड़े के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल और कुछ उत्पादों के आयात पर ड्यूटी में छूट का प्रस्ताव दिया गया है। इसका असर जूते, बेल्ट, बैग और अन्य लेदर उत्पादों की कीमतों पर दिख सकता है। यानी स्टाइल और जरूरत से जुड़ी चीजें अब थोड़ी सस्ती मिल सकती हैं।
बैटरी निर्माण को समर्थन, टेक प्रोडक्ट्स पर असर
लिथियम आयन सेल निर्माण से जुड़े मशीनरी और उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी छूट जारी रहने से भारत में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। इसका फायदा इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को मिलेगा और भविष्य में ईवी गाड़ियां सस्ती होने की राह आसान हो सकती है। साथ ही मोबाइल फोन और टैबलेट जैसे उपकरणों की कीमतों में भी राहत की उम्मीद है, जो आज हर घर की जरूरत बन चुके हैं।
किसानों और सहकारी सदस्यों के लिए टैक्स राहत
कपास बीज और पशु चारा सप्लाई से जुड़े सहकारी समितियों के सदस्यों को टैक्स छूट बढ़ाने का फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है। इससे किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा, जो सीधे गांव की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करेगा।
टैक्स विवाद में राहत
अगर कोई टैक्सपेयर पेनल्टी के खिलाफ पहली अपील करता है, तो सुनवाई के दौरान उस पेनल्टी राशि पर ब्याज नहीं लगेगा। इससे विवाद के दौरान लोगों पर तत्काल वित्तीय दबाव कम होगा और उन्हें अपना पक्ष रखने का समय मिलेगा।
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और क्या सस्ता, क्या महंगा
माइक्रोवेव, सोलर पैनल, कुछ इंपोर्टेड लकड़ी के सामान और कई जरूरी दवाइयां सस्ती हो सकती हैं। वहीं शराब, सिगरेट और पान मसाला पर टैक्स बढ़ाया गया है। यानी सेहत के लिए हानिकारक चीजें अब जेब पर और भारी पड़ेंगी।
यह बजट साफ संकेत देता है कि सरकार एक तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है, तो दूसरी तरफ ऐसी चीजों को महंगा कर रही है जो सेहत और समाज पर नकारात्मक असर डालती हैं। आम परिवारों के लिए यह बजट कई जगह राहत देता है, तो कुछ आदतों पर रोक लगाने का संकेत भी देता है।
Disclaimer :- यह लेख बजट घोषणाओं पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले आधिकारिक दस्तावेज या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।






